कहानी 4: घर के अंदर की सामाजिक स्थिति: एक बिहारी परिवार की उलझन
यह कहानी है एक बिहारी परिवार की, जहां पिता अब बुजुर्ग हो चुके हैं। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी परिवार के […]
यह कहानी है एक बिहारी परिवार की, जहां पिता अब बुजुर्ग हो चुके हैं। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी परिवार के […]
समाज में सत्य और तथ्यों का स्वरूप स्थिर नहीं है। यह समय, परिस्थितियों, और समाज के मूल्यों के साथ बदल
फिक्शन में सच्चाई: जब फिल्में, ओटीटी प्लेटफॉर्म और AI वास्तविकता को आकार देते हैं मीडिया-प्रधान इस युग में, फिल्में और
संपत्ति का असमान वितरण हमेशा से परिवारों और समाज में विवादों का एक प्रमुख कारण रहा है। यह समस्या बिहार
प्रिय छात्रों! हमारे ब्लॉग में आपका स्वागत है, जहाँ हम आपको आपकी पूरी क्षमता तक पहुँचने में मदद करने का